
नोएडा सेक्टर 150 मे 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत कोई अचानक हुआ हादसा नही थी बल्कि यह एक ऐसी कहानी है जिसमें एक इंसान धीरे धीरे मरता रहा और पुरा सिस्टम उसे बचाने के बजाय चुपचाप देखता रहा। 17 जनवरी की रात युवराज गुरुग्राम से अपने घर लौट रहा था कोहरा बहुत घना था। सेक्टर 150 के पास एक खतरनाक यू-टर्न है जिसके आगे डीवाईडर और उसके पीछे पानी से भरा गहरा गढ़ा है कोहरे की वजह से युवराज को यू टर्न दिखाई नही दिया। उसकी कार सीधी जाकर दीवार से टकराई और नाले को पार करते हुए पानी से भरे गढ़े मे जा गिरा।
रात करीब 12 बजे युवराज उस गढ़े मे गिरा। गढ़े मे 20 फिट से ज्यादा पानी था शुरू मे युवराज होश मे था उसने मदद के लिए आवाज लगाई, फिर अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन किया। फोन पर वह बार बार कह रहा था पापा मै डूब रहा हु। मुझे बचा लीजिये। मै मरना नही चाहत।
पिता यह सुनते ही घर से दौड़ पड़े। उन्होंने 112 नंबर पर पुलिस को भी फोन किया। करीब 12:25 बजे पुलिस के पास सूचना दर्ज हो जाती है लेकिन मौके पर पहुँचने मे पुलिस को 20 मिनट से ज्यादा समय लग जाते है जब पुलिस पहुची तब भी युवराज जिंदा था घना कोहरा था अंधेरा था पानी से भरा गढ़ा दिखाई नही दे रहा था युवराज कार के अंदर से निकलकर किसी तरह कार की छत तक पहुँच चुका था वह छत पर बैठकर मदद मांग रहा था अपने पिता से फोन पर जुडा हुआ था पिता और बेटा दोनों मोबाइल पर एक दूसरे की आवाज सुन पा रहे थे
लेकिन कोहरे की वजह से देख नही पा रहे थे बेटे ने मोबाइल की फ्लैश लाइट भी जलाई ताकि पिता उसे पहचान सके। लेकिन वहा मौजूद सिस्टम कुछ नही कर पाया। पुलिस ने हाथ खड़े कर दिये और जिम्मेदारी फायर ब्रिगेड और SDRF पर डाल दी। फायर ब्रिगेड आई, SDRF भी आई, लेकिन आधी अधूरी तैयारी के साथ। रस्सी फेकी गई, लेकिन रस्सी युवराज तक पहुँच ही नही पाई। सब किनारे खड़े रहे।
उसी दौरान वहा से गुजर रहा एक डिलिवरी बॉय मोनिँदर यह सब देख रहा था उससे रहा नही गया। जिस ठंडे पानी से डरकर सरकारी टिमे किनारे खड़ी थी मोनिँदर उसी पानी मे कुद पडा। करीब आधे घंटे तक वह युवराज को ढुंढता रहा, लेकिन अंधेरे और कोहरे की वजह से उसे कुछ दिखाई नही दिया। आखिर वह बाहर आया। कम से कम उसने इंसानियत तो दिखाई।
रात करीब पौने दो बजे युवराज का फोन अचानक बंद हो गया। यही वह वक्त माना जा रहा है जब युवराज डूब चुका था यानी करीब पौने दो घंटे तक वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता रहा, मदद मांगता रहा, लेकिन कोई उसे बचा नही सका। जीते जी तो युवराज को नही बचाया गया, लेकिन मरने के बाद भी उसकी लाश निकालने मे चार घंटे और लग गए।
सुबह करीब 6 बजे, जब 80 के करीब पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF के जवान मौके पर थे तब युवराज का शव बाहर निकाला गया। युवराज गुरुग्राम की एक कंपनी मे सॉफ्टवेयर इंजीनियर था उसके पिता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से डाइरेक्टर पद से रिटायर हो चुके है मा का कुछ साल पहले निधन हो गया था घर मे पिता और बेटा साथ रहते थे बहन की शादी हो चुकी है है और वह इंग्लैंड मे रहती है उस रात युवराज बस अपने घर पहुँचने ही वाला था लेकिन एक गलत मोड, घना कोहरा और सिस्टम की नाकामी ने उसकी जान ले लिया।
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