क्या है UGC के नियम । सवर्ण क्यों कर रहे है इसका विरोध ।

 

अगर आप कॉलेज मे पढ़ते है या आपके घर मे कोई हायर एडुकेशन ले रहा है तो पिछले कुछ दिनों से आपने UGC Eqeity Regulations 2026 का नाम जरूर सुना होगा। सोशल मीडिया व्हाट्सप, यूट्यूब और चाय की टपरी तक हर जगह इसी नियम की चर्चा है लोग पूछ रहे है की आखिर UGC ने ऐसा क्या नियम बना दिया की इतना हंगामा मच गया है आइये इसे बिल्कुल आसान भाषा मे समझते है।

 

UGC University Grants Commission यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने जनवरी 2026 मे एक नया नियम लागू किया है जिसका नाम है प्रोमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एडुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026 । इसका सीधा मतलब है कॉलेज और यूनिवर्सिटी मे पढ़ने वाले छात्रों के साथ जाती, लिंग या शरीरिक कमजोरी के आधार पर भेदभाव न हो, इसके लिए सख्त नियम बनाये गए है

 

इस नियम का मकसद है की sc st और obc वर्ग के छात्रों को कॉलेजों मे सुरक्षित माहौल मिले और उनके साथ जाती के नाम पर गलत व्यवहार न हो। लेकिन इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया है असल मे इस नये नियम मे obc वर्ग को भी sc/st के साथ जातिगत भेदभाव की श्रेणि मे शामिल कर दिया गया है पहले के ड्राफ्ट मे obc नही थे लेकिन बाद मे जोड़े गए।

 

इसके बाद जनरल कैटेगरी यानी सवर्ण वर्ग के छात्रों मे नाराजगी बढ़ गई । उनका कहना है की यह नियम एकतरफा है और इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है लोगो को डर है की अगर कोई झूठी शिकायत कर दे, तो बिना सही जांच के किसी छात्र का करियर खराब हो सकता है पहले ड्राफ्ट मे झूठी शिकायत पर जुर्माने का नियम था लेकिन फाइनल नियम मे उसे हटा दिया गया है जिससे चिंता और बढ़ गई।

 

इस पुरी नियम का जड़ रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों से जुड़ी है इन मामलों के बाद यह सामने आया की कई कॉलेजों और यूनिवर्सिटी मे पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव होता है उन्हे मानसिक रूप से परेसान किया जाता है जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, तो कोर्ट ने ugc को आदेश दिया की 2012 के पुराने नियमो को और मजबूत बनाया जाए।

 

इसके बाद फरवरी 2025 मे UGC ने नये नियमो के ड्राफ्ट जारी किया। इस ड्राफ्ट की की समीक्षा संसद की शिक्षा समिति ने की जिसके चेयरमैन कांग्रेस संसद दिग्विजय सिंह थे इस समिति ने सिफारिश दी की भेदभाव की परिभाषा मे OBC को भी शामिल किया जाय, और इक्विटी कमेटी मे sc  st और obc का अच्छा प्रतिनिधित्व हो।

 

साथ ही महिलाओं और दिव्यंगो को भी शामिल करने की बात कही गई। इन सिफारिशों के बाद UGC ने ड्राफ्ट मे बदलाव किये और 13 जनवरी 2026 को फाइनल नियम लागू कर दिये, जो 15 जनवरी 2026 से पूरे देश मे लागू हो गए।

 

अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी को इक्विटी कमेटी बनानी होगी। जिसमे sc, st, obc महिलाएं और दिव्यंगो के प्रतिनिधि होंगे। अगर कोई छात्र जातिगत भेदभाव की शिकायत करता है तो 24 घंटे के अंदर कारवाई शुरू करनी होगी और 60 दिनों के अंदर जांच पूरी करनी होगी। शिकायत करने के लिए छात्र को कई विकल्प मिलेंगे।

 

आनलाईन शिकायत, ईमेल, लिखित आवेदन या 24/7 हेल्प लाइन नंबर। अगर मामला गंभीर हुआ, तो पुलिस को भी सूचना दी जा सकती है अगर किसी छात्र को दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ चेतावनी, जुर्माना, सस्पेंसन या कॉलेज से निकालने जैसी करवाई हो सकती है अगर कोई पक्ष फैसले से खुश नही है तो वह 30 दिनों के अंदर लोकपाल जन प्रतिनिधि या शिकायत निवारण अधिकारी के पास अपील कर सकता है

 

सबसे सख्त बात यह है की अगर कोई संस्थान इन नियमो का पालन नही करता, तो UGC उसकी मान्यता रद कर सकता हैं या फंडिंग रोक सकता है यानी कॉलेज की डिग्री तक खतरे मे पड़ सकती है

 

 

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आखिर UGC है क्या क्यो हो रहा haie इसका विरोध।

 

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