जब जब बिहार मे 5% से ज्यादा बढ़ी वोटिंग बदल गई गई सरकार. पहले चरण मे 8% का इजाफा किसके के लिए टेंशन की बात है

बिहार विधान सभा चुनाव के पहले चरण की 121 सीटों पर गुरुवार को मतदान हुआ. इस बार बिहार के मतदाताओं ने वोटिंग के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये है पहली बार 64.70 फीसदी वोटिंग हुई है जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फीसदी ज्यादा है बिहार मे जब जब पांच फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई है तब तब सरकार बदल गई है

बिहार विधान सभा चुनाव के पहले चरण के 18 जिलों की 121 सीटों पर उतरे 1312 उम्मीदवारों की किस्मत इवीयम मे कैद हो गई हैं गुरुवार को पहले चरण मे मतदाताओं का उत्साह जबरदस्त देखने को मिला. पहले फ़ेज़ की 121 सीटों पर 64.70 फीसदी लोगो ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फीसदी  मतदान ज्यादा हुआ.

 

बिहार की सियासत मे इस बार के मतदान को आभूतपूर्ण माना जा रहा है क्योकि प्रदेश के इतिहास मे यह यह सर्वाधिक वोटिंग है साल 2020 मे पहले चरण मे 56.1 फीसदी वोटिंग हुई  लेकिन उस समय पहले फ़ेज़ मे 71 सीटों पर  चुनाव हुऐ थे जबकि इस बार 121 सीट पर चुनाव हुए है

 

चुनाव आयोग के मुताबिक पहले फ़ेज़ की 121 सीटों पर सीटों पर 64.70 फीसदी मतदान रहा जबकि 2020 के विधान सभा चुनाव मे इन सीटों पर 56 फीसदी के करीब मतदान रहा . अगर हम इस लिहाज से देखे तो वोटिंग पैटर्न कहता है की पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फीसदी वोटिंग ज्यादा हुई. इस बार चुनाव मे जिस तरह से मतदान बढ़ा है उससे सियासी दलों की धड़कने बढ़ गई है

 

बिहार के वोटिंग पैटर्न से संकेत मिल रहा है

 

वोटिंग फीसदी के घटने बढ़ने का सीधा साधा असर चुनाव के नतीजे पर भी पड़ता है भारत के चुनावी इतिहास मे आम तौर पर माना जाता है की जब वोटिंग ज्यादा होती है तो जनता बदलाव चाहती है लेकिन ऐसा हर बार नही होता.

 

चुनाव मे देखा गया है की कई बार अधिक मतदान का मतलब सरकार के प्रति समर्थन भी रहती है मतलब साफ है की वोटर्श की ये सक्रियता किस दिशा मे जायेगी. यह कहना जल्द बाजी होगी. धन्यवाद.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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