संविधान दिवस क्यों मनाया जाता है संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है क्यों की इसी दिन वर्ष 1949 मे भारत की संविधान सभा ने औपचारिक रूप से देश के संविधान को अपनाया था संविधान दिवस मनाये जाने की शुरूआत वर्ष 2015 मे हुई थी यह फैसला भारत सरकार ने संविधान के मुख्य शिल्पकार ड्रा बी. आर आंबेडकर की 125वि जयंती के अवसर पर लिया था इसका मुख्य उदेश्य देश के नागरिको मे संबैधानिक मुल्यो अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जगरुकता बढ़ाना और ड्रा आंबेडकर के योगदान को सम्मान देना है

जब 1947 मे हमारा देश आजाद हुआ, तब सबसे बड़ा सवाल था की अब ये इतना बड़ा देश कैसे चलेगा। अंग्रेजो के बनाये कानून तो काम नही कर सकते है इसीलिए हमारे लिडर्श ने मिलकर तय किया की हमें अपना खुद का, बिल्कुल नया कानून चाहिए । इस कानून को बनाने के लिए एक बड़ी टीम बनाई गई। जिसका नाम रखा गया संविधान सभा । ये टीम 1946 मे बनी थी इस सभा की पहली मीटिंग 9 दिसंबर 1946 को हुई थी इस सभा मे देश के हर कोने से हर तरह के लोग शामिल थे कुल 299 लोग। इन लोगो ने फैसला किया की हम दुनिया के बेस्ट कानून पढ़ेंगे और उनमे से जो बाते हमारे प्यारे देश भारत के लिए सबसे अच्छी होंगी। उन्हे चुनकर अपनी नई किताब मे लिखेंगे। ये काम आसान नही था लेकिन इन लिडर्श ने बिना थके, बिना रुक मेहनत किया, ताकि भारत एक मजबूत और न्याय वाला देश बन सके।
इस पूरी संविधान बनाने की कहानी मे एक नाम सबसे उपर है ड्रा बीआर आंबेडकर। उन्हे ही हम सब प्यार से संविधान का जनक या फादर आफ इंडियन कांस्टिट्यूशन कहते है संविधान सभा ने 29 अगस्त 1947 को एक खास कमेटी बनाई, जिसका नाम था मसौदा समिति या डीफ्टिंग कमेटी । इस कमेटी का काम था संविधान का कच्चा पक्का खाका तैयार करना। ड्रा आंबेडकर को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। उनके पास दुनिया भर के कानूनों का इतना ज्ञान था की उनके बिना ये काम हो ही नही सकता था उन्होंने खासकर ये पक्का किया की संविधान मे गरीबों को, दबे कुचले लोगो को और औरतो को बराबर हक और न्याय मिले । उनकी सोच थी की जब तक हर इंसान को बराबरी नही मिलती, तब तक सही आज़ादी अधूरी है आज जो हमे अपने हक मिले है उनके पीछे ड्रा आंबेडकर की ही मेहनत है
संविधान बनाना कोई 2 मिनट का काम नही था बल्कि एक मैराथन दौड़ थी ईसे पुरा करने मे पूरे 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का लंबा समय लगा। आप सोचिये। इस दौरान, संविधान सभा ने 11 बार बड़ी बड़ी मीटिंग की जो कुल मिलाकर 165 दिन चली। मीटिंग मे क्या हुआ? खूब बहस हुई। दुनिया के लगभग 60 देशों के संविधानो पढ़ा गया। मसौदा कमेटी ने जो शुरुआती ड्राफ्ट दिया था उस पर लोगो ने हजारो सुझाव दिये। कुल 7635 तरह के सुधार के प्रस्ताव आये, जिनमे से 2473 पर बहुत गंभीरता से चर्चा की गई। हर बात पर खूब सवाल जवाब हुए। ताकि जो फाइनल कानून बने, वो एकदम परफेक्ट हो। इस पूरे काम मे उस जमाने मे लगभग 64 लाख रुपये खर्च हुए थे यह दिखाता है की हमारे देश के लीडर्स ने हमें ये महान किताब देने के लिए कितनी जी तोड़ मेहनत की थी
लगातार बहस और कड़ी मेहनत के बाद वो ऐतिहासिक दिन आया: 26 नवंबर 1949। इसी दिन, संविधान सभा ने आखिर कार हमारे संविधान को मान लिया लिया उस पर अपनी मुहर लगा दिया। जब यह तैयार हुआ। तब इसमें एक सुरुआति पन्ना 22 हिस्से 395 नियम और 8 लिस्टें थी मीटिंग मे मौजूद सभी मेंबर्श ने खुशी खुशी इस पर साईंन किये। मजे की बात ये है की यह संविधान हाथ से लिखा गया था। इसे प्रेम बिहारी नारायण राय जादा नाम के एक कलाकर ने बहुत सुंदर एलाइटिक स्टाइल मे लिखा था। हालाँकि हमने इसे 26 नवंबर को मान लिया, पर हमने इसे पूरी तरह लागू नही किया था पूरी तरह लागू करने के लिए एक और खास तारीख चुनी गई थी जिसके बारे मे हम अगले पॉइंट मे जानेंगे। यह मान लेने वाला दिन ही है जिसे हम संविधान दिवस कहते है
अब आप सोचेंगे की जब 26 नवंबर 1949 को संविधान तैयार हो गया, तो इसे उसी दिन पूरा लागू क्यो नही किया गया? क्यों हमने 26 नवंबर 1950 तक इंतजार किया? इसके पीछे एक इमोशनल कनेक्शन है दर असल 1930 मे कांग्रेस पार्टी ने इसी 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था और उस दिन को आजादी दिवस के रूप मे मनाया था हामारे लीडर्स चाहते थे की इस ऐतिहासिक दिन का महत्व बना रहे। इसीलिए उन्होंने तय किया की भले ही संविधान 26 नवंबर को बन गया हो। लेकिन इसे देश पर पूरी तरह से लागू हम 26 जनवरी को करेंगे। यही वजह है की 26 जनवरी को हम गड़तंत्र दिवस के रूप मे मनाते है तो याद रखिये 26 नवंबर वह दिन है जब हमने संविधान बना कर उसे मान लिया, और 26 जनवरी वह दिन है जब हमने उसे पूरे देश मे लागू कर दिया। धन्यवाद।
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