
Galgotias university Controvercy
20 Feb 2026 3:55PM
आज की इस वीडियो में हम बात करने वाले हैं उस विवाद की जिसने पूरे देश में AI, एजुकेशन और “Make in India” पर बड़ी बहस छेड़ दिया है । मामला है Galgotias University और India AI Impact Summit का। यह समिट भारत का बड़ा टेक इवेंट था जहाँ देश-विदेश के वैज्ञानिक, कंपनियां और सरकारें AI की उपलब्धियां दिखाने आई थीं। लेकिन इसी मंच पर एक ऐसा कांड हुआ जिसने यूनिवर्सिटी की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनल तक हर जगह सिर्फ एक ही चर्चा — “चीन का रोबोट और भारत का दावा!”
कहानी की शुरुआत होती है AI Impact Summit 2026 से, जो नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इस समिट का उद्देश्य था भारत की AI क्षमता को दुनिया के सामने दिखाना। सरकार का फोकस था कि भारत AI में आत्मनिर्भर बन रहा है। लेकिन इसी मंच पर एक यूनिवर्सिटी ने ऐसा दावा कर दिया जिसने पूरी कहानी पलट दी। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ यूनिवर्सिटी विवाद नहीं बल्कि “राष्ट्रीय इमेज” से जुड़ा मुद्दा बन गया। समिट में Galgotias University ने अपने स्टॉल पर एक चार पैरों वाला रोबोट दिखाया। इस रोबोट का नाम रखा गया — “Orion”। स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधि नेहा सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह रोबोट यूनिवर्सिटी के Centre of Excellence ने बनाया है। और यूनिवर्सिटी ₹350 करोड़ का AI इकोसिस्टम इन्वेस्टमेंट करने वाली पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी है. प्रोफेसर नेहा सिंह ने बताया कि ओरियन कैम्पस में घूमता है और सर्विलांस व मॉनिटरिंग का काम करता है, यही बयान बाद में पूरे विवाद की जड़ बन गया। क्योंकि वीडियो वायरल होते ही टेक एक्सपर्ट्स और इंटरनेट यूजर्स ने कुछ ऐसा नोटिस किया जिसने पूरी कहानी बदल दी।
लोगों ने स्क्रीनशॉट निकालकर बताया कि यह रोबोट कोई भारतीय इनोवेशन नहीं बल्कि चीन की कंपनी का प्रोडक्ट है। यह रोबोट असल में Unitree Robotics द्वारा बनाया गया Unitree Go2 मॉडल था। यह इंटरनेट पर खुलेआम बिकता है और इसकी कीमत करीब 2–3 लाख रुपये है।
यानी जो रोबोट भारत के AI समिट में “इनोवेशन” के रूप में दिखाया जा रहा था, वह पहले से मार्केट में बिकने वाला कमर्शियल प्रोडक्ट निकला। बस फिर क्या था — सोशल मीडिया पर आरोप लगने लगे कि यूनिवर्सिटी ने विदेशी टेक को अपना बताने की कोशिश की। आलोचना इतनी तेज हुई कि मामला राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया। अब सवाल उठता है — क्या यूनिवर्सिटी ने सच में झूठ बोला था? शुरुआती वीडियो और बयान देखकर ऐसा लगा कि हाँ, यूनिवर्सिटी दावा कर रही थी कि रोबोट उनका है। लेकिन विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि रोबोट छात्रों की पढ़ाई के लिए खरीदा गया था और प्रतिनिधि representative नेहा सिंह गलत जानकारी” दे बैठी।
यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि “एक प्रतिनिधि गलत जानकारी दे बैठा और वह मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत authorized नहीं था।” उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान का उद्देश्य गलत प्रस्तुति देना नहीं था। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। क्योंकि सरकार ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया। IT सचिव ने साफ कहा — किसी भी प्रदर्शक को ऐसी चीज नहीं दिखानी चाहिए जो उसकी अपनी न हो। यानी सरकार ने इसे सिर्फ “गलतफहमी” नहीं बल्कि “मिसरिप्रेजेंटेशन” का मामला माना। सबसे बड़ा एक्शन तब हुआ जब आयोजकों ने Galgotias University को अपना स्टॉल हटाने के लिए कह दिया। यानी समिट के बीच में ही यूनिवर्सिटी को अपना एग्जीबिशन बंद करना पड़ा। यह एक बहुत बड़ा और शर्मनाक कदम माना गया क्योंकि ऐसा आमतौर पर नहीं होता है यहाँ से मामला और गंभीर हो गया। क्योंकि खबर आई कि सरकार इस यूनिवर्सिटी की गतिविधियों की जांच कर सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूनिवर्सिटी को UP Private University Act के तहत जांच के दायरे में लाया जा सकता है।
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