Chhatrapati Shivaji Maharaj: के बारे मे पूर्ण जानकारी…

भारत के इतिहास में एक ऐसा समय आया जब दिल्ली के मुगल सम्राज्य और दक्षिण के सुल्तानों के बीच लगातार संघर्ष चल रहा था गाव पर हमला किसानों से जबरन वसूली महिलाओं के साथ अत्याचार और आम आदमी पर अत्यधिक टैक्स जैसी स्थितियाँ समान्य बन चुकी थी इसी दौर में 19 फेबररी 1630 को शिवनेरी किले में एक बच्चे का जन्म हुआ जिसका नाम रखा गया शिवजी भोसले जन्म के समय से ही कोई विशेषता नहीं दिखाई देती थी कोई भविष्य वाणी नहीं हुई थी सब कुछ बिल्कुल एक आम परिवार की तरह था पिता शाह जी भोसले एक यौद्धा थे लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से ज्यादा समय घर से दूर रहते थे इसीलिए शिवाजी कि परवरिश ज्यादातर उनकी माँ जीजाबाई के द्वारा हुई। शिवजी बचपन मे किसी चमत्कार की तरह नहीं थे लेकिन वह अपने आसपास कि समस्याओं को समझते थे जब गाव के लोग अन्याय की शिकायतों के साथ जीजाबाई और किले के अधिकारियों के पास आते तब शिवजी शांत खड़े होकर सब सुनते थे धीरे-धीरे उनके मन मे यही समझ बनी कि सत्ता का मतलब लोगों कि ताकत नही बल्कि लोगों कि रक्षा है
Written by: sumant kumar yadav
युवा होते होते शिवाजी ने यह महसूस किया कि अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना तभि संभव है जब अपने पास शक्ति हो शक्ति केवल सैनिकों और धन से नहीं बल्कि वफादार लोगों और ठोस योजना से मिलती है इसीलिए शिवजी ने किसी बड़े युद्ध के बजाय एक छोटा सटीक और समझदारी वाला कदम चुना उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद लोगों का समूह बनाया जिन्हें आज लोग मावले के नाम से जानते हैं यह लोग संख्या में कम थे लेकिन इमान्दार और पूरे निष्ठा वाले थे शिवजी ने योजना बद्ध तरीके से अपने आसपास के छोटे किलो पर नियंत्रण शुरू किया और किसी भी किले पर हमला करने से पहले उसकी भौगोलिक स्थिति सुरक्षा व्यवस्था सैनिकों की संख्या और जनता की स्थिति का पुरा अध्ययन कीया पहले जीत उन्हें तोरणगण किले पर मिली। सत्य यही है की इस जीत के समय शिवाजी की पास बड़ी सेना नहीं थी नहीं अधिक धन लेकिन योजना बिल्कुल सही थी और इसलिए विजय मिले।
और आगे तोरणगण की सफलता के बाद शिवजी का आत्मविश्वास बढ़ा लेकिन घमंड नहीं आया उन्होंने एक-एक करके आसपास के कई किले कूटनीति और युद्ध दोनों के मिश्रण से अपने नियंत्रण में लिये इससे स्थानीय किसानों और व्यापारियों में शिवजी के प्रति विश्वास बढ़ता गया क्योंकि शिवजी किले काव्जा करने के बाद जनता पर कोई अतिरिक्त टैक्स या अत्याचार नही करते थ इस वजह से जनता स्वयं शिवाजी को समर्थन देने लगी लेकिन जैसे शिवजी की शक्ति बढ़ी वैस वैसे सुल्तानों कि नजर उन पर टिक गई आदिल शाह के सेनापति अफजल खान को शिवाजी को रोकने का आदेश दिया । अफजल खान केवल बल में विश्वास रखता था और मानता था कि शिवाजी उसके सामने टिक नही पाएंगे उसने शिवाजी को बातचीत के बहाने मिलने के लिए बुलाया लेकिन असल उद्देश्य शिवाजी को हत्त्या करके खत्म करना था शिवाजी इस को समझ चुके थे और पूरी तैयारी की साथ मिलने पहुंचे मुलाकात के दौरान अफजल खान ने वार किया लेकिन शिवाजी सुरक्षात्मक कवच पहने हुए थे और उन्होंने आत्मा रक्षा में जवाबी वार कीया इस घटना के बाद अफजल खान की सेना पर शिवाजी कि सेना ने हमला किया और युद्ध समाप्त हुआ यहाँ कोई चमत्कार नहीं था यह तैयारी और राजनीति का परिणाम था धन्यवाद।
