
उत्तर भारत में आजकल बुलडोजर की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई दे रही हैं आपको समझना होगा की जब भी किसी दलित या गरीब की झोपड़ी पर बुलडोजर चलता है तो सरकार अक्सर यह तर्क देती है की जमीन सरकारी है या कब्जा किया गया है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की बड़े बड़े आलिसान माल और रसुखदारो के अबैध निर्माणों पर यह पिला पंजा उतनी तेजी से क्यों नही चलता जितना एक गरीब की बस्ती पर चलता है असल मे यह पूरी प्रक्रिया कानून के नाम पर की जा रही एक ऐसी करवाई है जिसमे चुनिंदा लोगो को निशाना बनाया जाता है और इसमें सबसे ज्यादा प्रताड़ित दलित और वंचित समाज हो रहा है सरकारी आकड़ो और जमीनी हकीकत को देखे तो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यो मे बुलडोजर का इस्तेमाल न्याय प्रक्रिया के विकल्प के रूप मे किया जाने लगा है। संबिधान कहता है की कीसी भी व्यक्ति का घर गिराने से पहले उसे उचित नोटिस दिया जाना चाहिए और उसे अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। लेकिन व्रतमान सरकार की कार्यप्रणाली को देखा गया है की रात को नोटिस चिपका दिया जाता हैं और सुबह बुलडोजर पहुँच जाता हैं ताकि पीड़ित को अदालत जाने का समय ही न मिले। यह सीधे तौर पे कानून की धज्जिया उडाने जैसा है क्यो की सजा देने का काम न्यायपालिका का है न कि कार्यपालिका का लेकिन यहाँ सरकार खुद ही जज और खुद ही जल्लाद बनी बैठी है।
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