
सबसे पहले समझते है की मामला शुरू कैसे हुआ। उतर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की लोक गायिका रुचि यादव ने एक विराहा गीत गाया , जो कथित तौर पर मायावती पर आधारित था बिराहा उत्तर प्रदेश और बिहार का परंपारिक लोकगीत होता है जिसमे अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर व्यंग और तंज होते है लेकिन आरोप है की इस बार गीत मे ऐसे शब्द इस्तेमाल किये गए जो बसपा को अपमान जनक लगे। जैसे ही यह गीत वायरल हुआ, बसपा के कार्यकरताओ मे नाराजगी फैल गई। पार्टी ने इसे केवल आलोचना नही बल्कि अपमान बताया। सवाल यह उठता है की क्या राजनीतिक व्यंग की कोई सीमा होती है और अगर होती है तो वह सीमा कौन तय करता है?
बसपा नेताओ का कहना है की यह गीत सिर्फ आलोचना नही बल्कि दलित समाज की सबसे बड़ी नेता का अपमान है उनका दावा है की मायावती केवल एक राजनीतिक नेता नही बल्कि करोडो लोगो की भावनाओ से जुड़ी प्रतिक है इसीलिए उनके खिलाफ अपमान जनक भाषा इस्तेमाल करना पूरे समुदाय की भावनाओ को ठेस पहुँचाना है पार्टी का कहना है की यह मामला व्यक्तिगत नही बल्कि सामाजिक सम्मान का है यही कारण है की उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और कानूनी कारवाई का फैसला किया। यही से यह विवाद राजनीतिक से कानूनी मोड लेता है
अब बात करते है FIR की। बसपा की शिकायत पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने रुचि यादव के खिलाफ केस दर्ज किया। आरोप क्या है आरोपो मे मान हानि, आपतिजनक सामग्री फैलाने और सामाजिक तनाव बढ़ाने जैसी धाराये शामिल बताई जा रही है पुलिस का कहना है की जाच के बाद ही आगे की करवाई तय होगी। लेकिन FIR दर्ज होते ही सोशल मीडिया दो हिस्सों मे बांट गया।
एक पक्ष कह रहा है की कानून अपना काम कर रहा है दूसरा कह रहा है की कलाकारों की आवाज़ दबाई जा रही है
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