उना केस: उना केस मे 37 लोगो को बरी किया गया और 5 को जेल भेज दिया गया.
उना, गुजरात मे साल 2016 मे कथित गोकसी के आरोप को लेकर दलित युवको हुए हमले के मामला मे करीब 10 साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है इस मामले मे कुल 42 आरोपीयो को कटघरे मे खड़ा किया गया था जिनमे से 37 आरोपियों को सबूतो के अभाव मे बरी कर दिया गया, जबकि पांच आरोपियों को दोषी ठहराया गया है अदालत ने इन दोषियों को 5-5 साल की सजा सुनाई है आइये इस मामला को थोड़ा विस्तार से जान लेते है
गुजरात के उना मे लगभग 10 साल पहले कुछ दलित युवकों को अधनंगा कर सरेआम पिटा गया था यह पूरा मामला उना तालुका के मोटा संमधियाला गाँव है मारपीट की घटना 11 जुलाई 2016 को हुई थी यहाँ एक दलित परिवार के चार युवको को बीफ रखने के आरोप मे सरेआम लाठियों और बेल्टो से पिटा गया था पिटने वाले तथाकथित गौरक्षक थे गौ रक्षक ने उन पर गाय को मारने का आरोप लगाया था जबकि पीड़िता युवाओं का कहना था की व सिर्फ मरी हुई जानवरो की खाल उतारने का काम करते है इसके बाद भी उनकी पिटाई की गई थी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही पूरे देश मे यह मामला चर्चा मे आ गया था घटना के बाद गुजरात और देश के अलग- अलग हिस्सों मे कई दिनों तक प्रदर्शन हुए थे उना कांड को 10 साल बाद भी आज तक कोई नही भुला है इस घटना के बाद गुजरात समेट देशभर मे दलितो की सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किये गए थे हालाँकि इस पूरे मामले मे सुरुआत 42 लोगो के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया था इनमे हत्त्या के प्रयास, डकैती जैसी धाराये शामिल की गयी थी हालाँकि कोर्ट ने हत्त्या के प्रयास, डकैती, अपहरण दंगा और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों मे उन्हे दोषी नही माना है करीब 10 साल चली इस मामले की सुनवाई मे 260 से ज्यादा लोगो की गवाही दर्ज कराई गई थी 16 मार्च 2026 को कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 37 लोगो को बरी कर दिया है जबकि बचे हुए पांच लोगो को दोषी ठहराया है जिनकी सजा का एलान आज यानी 17 को किया गया.
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