आज हम ऐसे विषय पे बात करने जा रहे है जो भारती समाज और राजनीति का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल है विषय है बहुजन एकता सपना या सच्चाई यानी SC, st और अन्य पिछड़ा वर्ग OBC जैसे तमाम समुदाय जो देश की आबादी का बहुमत है यह समुदाय एकजुट हो पाये है या यह एक सिर्फ राजनीतिक नारा भर है आज के इस वीडियो मे हम इस सवाल का जवाब ढुंढ़ने का प्रयास करेंगे।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है की बहुजन आखिर है क्या बहुजन का मतलब है बहुत सारे लोगो का समूह यानी बहुमत । इसका मतलब उन तमाम जातियों और समुदायों से है जिन्होंने सदियों से सामाजिक और आर्थिक भेदभाव झेला है इनमे मुख्य रूप से तीन बड़े समूह शामिल है SC जिन्हे पहले अछूत या दलित कहा जाता था ST यानी आदिवासी समुदाय। और अन्य पिछडा वर्ग OBC यानी वे जातियाँ जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी हुई मानी जाती है एक अनुमान के मुताबिक भारत की कुल आबादी मे इन तीनो समूहों की हिस्सेदारी लगभग 85% के आसपास है यानी सैधांतिक रूप से अगर यह 85% आबादी वास्तव मे एकजुट हो जाय, तो देश का हर चुनाव हर सामाजिक बदलाव इन्ही के इच्छा से तय होगा। लेकिन क्या ऐसा हो पाता है यही तो मेन सवाल है
बहुजन एकता की बात करे तो सबसे पहला नाम आता है महात्मा ज्योतिबा फुले का। 19वीं सदी मे जब भारत मे सामाजिक ब्यार बहनी शुरू हुई, तो ज्योतिबा फुले ने 1873 मे सत्य समाजशोधक की स्थापना किया। उनका मकसद था शूद्रो और अति-शुद्रो को ब्राह्मणवादी व्यवस्था के चंगुल से आज़ाद कराना। शूद्रो और अति- शूद्रो जिन्हे आज OBC और SC कहा जाता है फुले ने सभी निचली जातियों को एक मंच पर लाने का पहला ठोस प्रयास किया। उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोलकर शिक्षा के क्षेत्र क्रांति की शुरुवात किया। फुले का विचार धारा था की शिक्षा और एकजुटता के बल पर ही बहुजन अपना हक हासिल कर सकते है यह बहुजन एकता का पहला विज़ारोपन था
Uncover a realm of opportunities.
Exploring life’s complex tapestry, options reveal routes to the exceptional, requiring innovation, inquisitiveness, and bravery for a deeply satisfying voyage.

Bahujan Unity
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